Monday, November 4, 2013

दिल जला के मनाई दिवाली।

लेखनी के साथ खेलने का इनका एक अलग ही अंदाज़  है I
हथियार कलम है इनका और ये एक उम्दा जंगबाज़ है …

पेश है बड़े भैया तुल्य कविवर कि कुछ पंक्तियाँ।.

दोस्तों प्यार से सुनो ग़ज़ल

जुल्म ढाती रही रात काली,
दिल जला के मनाई दिवाली।
चांद से शिकवा करे है चकोरा,
रैन आती नही मिलन वाली।
कसर हम भी नही छोड़ते पर,
क्या करे आजकल जेब खाली।
याद उसकी रहे पास हरदम,
बेवफा ने कसम तोड़ डाली।
ये समझ से परे क्या करे हम,
किसलिये क्यों खफा बाग़ माली 
                             ...राजेन्द्र रैना 

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