Thursday, November 14, 2013

जब खड़े होगे अकेले...

 सुप्रभात दोस्तों आपके सामने खुद पंक्तियाँ प्रस्तुत है,
 जिसे मैंने एक दोस्त के कहने पे लिखा था।
अपनी राय जरूर दें …

 जब खड़े होगे अकेले
 साथ मुझे पाओगे !
 यादों के झरोखे में,
 रोते ही जाओगे.…
 हर कोई होगा साथ,
 खुद को अकेला पाओगे।
 आँसू आखों से छलकेंगे,
 और तुम डूबते जाओगे।
 जब  किसी को याद
 कर-कर के बुलाओगे,
 चेहरा तो खुश होगा,
 आखों को रुलाओगे !
 तकलीफें छोटी हो जायेगी।
 वजह तेरे जब भी किसी 
 भूखे को रोटी हो जायेगी !
 रखना यकीं  इरादों पे,
 इतना अपने, और देखना
 आप बड़े हो जाओगे
 सपने छोटी हो जायेगी !
 मेरे ख्यालों में जो]
 खुद को उलझाओगे,
 उलझते ही चले जाओगे …
 तुम मुझे भूल भी जाओ शायद ?
 मेरे शब्दों को भूल न पाओगे …
                        …निशब्द अभय 

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