सुप्रभात दोस्तों आपके सामने खुद पंक्तियाँ प्रस्तुत है,
जिसे मैंने एक दोस्त के कहने पे लिखा था।
अपनी राय जरूर दें …
जब खड़े होगे अकेले
साथ मुझे पाओगे !
यादों के झरोखे में,
रोते ही जाओगे.…
हर कोई होगा साथ,
खुद को अकेला पाओगे।
आँसू आखों से छलकेंगे,
और तुम डूबते जाओगे।
जब किसी को याद
कर-कर के बुलाओगे,
चेहरा तो खुश होगा,
आखों को रुलाओगे !
तकलीफें छोटी हो जायेगी।
वजह तेरे जब भी किसी
भूखे को रोटी हो जायेगी !
रखना यकीं इरादों पे,
इतना अपने, और देखना
आप बड़े हो जाओगे
सपने छोटी हो जायेगी !
मेरे ख्यालों में जो]
खुद को उलझाओगे,
उलझते ही चले जाओगे …
तुम मुझे भूल भी जाओ शायद ?
मेरे शब्दों को भूल न पाओगे …
…निशब्द अभय
जिसे मैंने एक दोस्त के कहने पे लिखा था।
अपनी राय जरूर दें …
जब खड़े होगे अकेले
साथ मुझे पाओगे !
यादों के झरोखे में,
रोते ही जाओगे.…
हर कोई होगा साथ,
खुद को अकेला पाओगे।
आँसू आखों से छलकेंगे,
और तुम डूबते जाओगे।
जब किसी को याद
कर-कर के बुलाओगे,
चेहरा तो खुश होगा,
आखों को रुलाओगे !
तकलीफें छोटी हो जायेगी।
वजह तेरे जब भी किसी
भूखे को रोटी हो जायेगी !
रखना यकीं इरादों पे,
इतना अपने, और देखना
आप बड़े हो जाओगे
सपने छोटी हो जायेगी !
मेरे ख्यालों में जो]
खुद को उलझाओगे,
उलझते ही चले जाओगे …
तुम मुझे भूल भी जाओ शायद ?
मेरे शब्दों को भूल न पाओगे …
…निशब्द अभय

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