अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। पलक झपकते कबूतर गायब कर देता था। उसको ऐसे कई खेल आते थे हंसते को रुला देता था रोते को हंसा देता था। वो अपने खेल में दुःख देने वाले दानव को पाताल लोक में भेज देता था, ताकि वो फिर से ना आ सके और लोगों में जादूगर जीत जाता था।
बच्चे समझते थे जादूगर कुछ भी कर सकता है। वो बहुत तेज़ दिमाग आदमी है, वो आदमी नहीं जादूगर है। जादूगर जादू करके सब कुछ ठीक कर सकता है। वहीं जवान और बूढ़े करतब, विज्ञान और हाथों की सफाई समझते थे। जो उसके जादू को समझना था वह बच्चे पैसे नहीं दे सकते थे जो पैसे दे सकते थे वह बड़े लोग बुजुर्ग लोग उसे चालबाज और खेलबाज़ कहते थे।
जादूगर जादू दिखने के बदले बहुत कम पैसे लेता था और जिसके पास पैसे न हो, उसको मुफ़्त में करतब दिखाता था। वो सबको ज़िंदादिल लगता, सबका हीरो मसीहा। वैसे तो हर जगह चालू करने वाला जादूगर घर वालों पर जादू नहीं कर पता था। घर के सब नाराज रहते थे उससे कहते सबको खुश रखते हो घर पर तुम्हारी जादूगरी नहीं चल पाती, आटा दाल बनाने वाली जादू कर के ले आओ न। वो था की घर में किसी की नहीं सुनता था कहता था एक दिन वो बहुत बड़ा जादू करेगा, छड़ी घुमाएगा और सबकुछ बदल जाएगा और वह जोर से हंसने लगता उसके हंसी में आत्मविश्वास होता था कि वह सब कुछ बदल देगा पल भर में।
जब वो जादूगर, अपने कपड़े पहनता तो उसमें शक्तियां जन्म ले लेती। रंग-बिरंगे कपड़े पहन कर वह खुश हो जाता था क्योंकि इससे वह किसी रोते हुए को हंसने के लिए तैयार हो जाता था।
दिन भर सबको करतब दिखाता,
शाम को जब हुआ लौट कर आता।
घर में नहीं होता अनाज दाना,
घर वाले कसने लगता ताना।
कहते हैं यह सब को बाहर हंसता है,
फिर भी घर में दाना पानी नहीं ला पता है
कैसा है यह जादूगर?
जिसको घर की रोटी की चिंता नहीं सर पर
इस पर जादूगर कहता एक दिन बड़ा जादू करूंगा
सबकी ख्वाहिशों को चुटकी में भरूंगा
फिर घर में भी कोई नहीं होगा उदास
सबके लिए उपहार होगा खास
बुरे दिन टल जाएंगे अच्छे दिन खिल खिलाएंगे
अगले दिन जादूगर उठा, और घर में सबसे बोला
आज करने जा रहा हूं बड़ा जादू
दिल पर रखना काबू... कुछ बड़ा होने वाला है।
खुशियां जागने वाली है, दुख का दानव सोने वाला है।
जादूगरी का सामान उठाया, चल पड़ा घर से...
पहुंच गया दिखने जादू भीड़ देखकर जादूगर को हो गए बेकाबू
कहां आज जादूगर दिखाने वाला है कुछ खास
सभी लोग उत्सुक थे दबाकर बैठे थे सांस
इतने में जादूगर आया हाथ में छड़ी उठा कर लाया और बोला आदमी को कबूतर, कबूतर को आप भी बना दूं।
तुम जो कहोगे वह खेल तुमको दिखा दूं ।
लोग बजाने लगे ताली कोई जगह नहीं रह गई खाली
हर तरफ तालिया की गाड़ाहट थी।
जादूगर के हाथ में छड़ी
वह भी इतनी बड़ी
उसको वउसको घुमाया, और लोगों को बताया मैं खुद को संदूक में बंद कर रहा हूँ,
जब मुझको हो बुलाना मुझे बस इतना आवाज लगाना
अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...
संदूक में खुद को बंद कर लिया और अंदर से आवाज लगाया...अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...
कुछ देर बाद संदूक खोला उसमें नहीं था जादूगर, उसमें पड़ा था एक कबूतर... संदूक खोलते ही वह उड़ गया।
कुछ देर बीता तो लोग ढूंढने वालों की जादूगर किधर गया?
वो आएगा?
किधर से आएगा? लोग कर रहे थे इंतजार, कह रहे थे बार बार
अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... नहीं लौटा जादूगर, लोग कहने लगे जादूगर अपने ही जादू में गायब हो गया।