Sunday, November 10, 2013

आखिर क्यों ?

आखिर क्यों ? ये बच्चे ईटों के भट्ठों में अपनी कोमल हाथों में कलम के बजाय ईंटों को संतुलित करना सीखते हैं ?
 आखिर क्यों ये मजदूरी करने को मजबूर हैं ?
आखिर क्यों इनकी आँखे इंजीनियर और डॉक्टर बनने के खवाब नहीं देख पाती ?
 ये सोंचने का समय हमारे सरकार के पास नहीं है, और हमारे देश के कुछ बुद्धिजीवी लोग अपनी लाल और पिली  बत्ती युक्त  वातानुकूलित गाडिओं से गरीब बस्तिओं में जाकर चार कॉंपी  और कलम बाँट कर देश को शिक्षित देखना चाहते हैं…
अगर ये सच है कि बच्चे देश का भविष्य होते  हैं? तो आप ये देख सकते है कि हमारे देश कला भविष्य कैसा होने वाला है ???
 इसके लिए अगर कोई उचित कदम नहीं उठाये गए तो हम एक उन्नत देश के श्रेणी मै कभी खड़े नहीं हो पाएंगे ??? !!!

शिक्षित देश का निर्माण तब तक सम्भव नहीं हो सकता जब तक इनके पेट को भर नहीं दिए  जाते , जब तक इनके आत्मा को तृप्त नहीं कर दिए जाते …
  

                                             …निशब्द अभय

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