Friday, May 31, 2013

UNKE YAADO KE "GUM" SE !

--: DIL ke daag :-- 

DIL KE DAAG DHULTE NAHI,

AASUON KE JAL SE !

DIL KE JAKHM BHARTE NAHI,

KISI BHI MARHAM SE!

BHOOLTA NAHI HAI WO MANZAR,

AB BHI SIHAR UTH'TA HUN!

ZALIM NE CHALAI THI CHHURI !

BADI HI BERAHAM SE !

APNI BHI KHAMOSHI,

BHI CHIKHTI JAA RAHI HAI!

YAADO KE DARWAZE PEET RAHI HAI,

BADE HI DAM-KHAM SE 

AB YE ZINDAGI BHI KAAT LENGE

UNKE YAADO KE "GUM" SE ! 



*** दिल के दाग ***

दिल के दाग धुलते नही ,

आंसूओ के जल से *

दिल के ज़ख्म भरते नही ,

किसी भी मरहम से
 
भूलता नही है, मंज़र ,

अब भी सिहर उठता हूँ *

जालिम ने चलाई थी छुरी ,

बडी ही बेरहम से *

अपनी ही खामोशी ,

चिखती ही जा रही है *

यादों के दरवाज़े पीट रही है ,

पुरे ही दम खम से *

मलाल नही ,रश्क है ,

जो अरमान मेरे लूट गये *

अच्छा ही हुआ "आनन्द",

जिन्दगी काट ही लेंगे,उसके ही गम से *
                         
                                                 ......BY MR. ANAND

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