मैं नज़र से पी रहा हूँ, ये समा बदल न जाए
न झुकाओ तुम निगाहें, कहीं रात ढल न जाए
मेरे अश्क भी हैं इस में, ये शराब उबल न जाए
मेरा जाम छूनेवाले, तेरा हाथ जल न जाए
तेरा रिंद गिरते गिरते, कहीं फिर संभल न जाए
मेरी ज़िंदगी के मालिक, मेरे दिल पे हाथ रखना
तेरे आने की खुशी में मेरा दम निकल न जाए
मुझे फूँकने से पहले मेरा दिल निकाल लेना
ये किसी की है अमानत कहीं साथ जल न जाए
-अनवर मिर्जापुरी
मैं नज़र से पी रहा हूँ, ये समा बदल न जाए
न झुकाओ तुम निगाहें, कहीं रात ढल न जाए
मेरे अश्क भी हैं इस में, ये शराब उबल न जाए
मेरा जाम छूनेवाले, तेरा हाथ जल न जाए
तेरा रिंद गिरते गिरते, कहीं फिर संभल न जाए
मेरी ज़िंदगी के मालिक, मेरे दिल पे हाथ रखना
तेरे आने की खुशी में मेरा दम निकल न जाए
मुझे फूँकने से पहले मेरा दिल निकाल लेना
ये किसी की है अमानत कहीं साथ जल न जाए
-अनवर मिर्जापुरी
न झुकाओ तुम निगाहें, कहीं रात ढल न जाए
मेरे अश्क भी हैं इस में, ये शराब उबल न जाए
मेरा जाम छूनेवाले, तेरा हाथ जल न जाए
तेरा रिंद गिरते गिरते, कहीं फिर संभल न जाए
मेरी ज़िंदगी के मालिक, मेरे दिल पे हाथ रखना
तेरे आने की खुशी में मेरा दम निकल न जाए
मुझे फूँकने से पहले मेरा दिल निकाल लेना
ये किसी की है अमानत कहीं साथ जल न जाए
-अनवर मिर्जापुरी
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