Tuesday, April 23, 2013

kuch aisi hai teri yaad..........

mai apne priya mitr ki khoobsurat panktiytan aapko sounp raha hu, ummid hai apko acchi lagegi?
अनायस ही किसी की याद में ........
"कुछ ऐसी है तेरी याद "
किसी खाली मकान के
बंद खिड़की दरवाजों पे
लगातार दस्तक देती
हृदय के अंतर द्वन्द में
परिचित प्रश्न की भांति
निरंतर विश्राम करती
कभी न भूलने वाली
न कभी मिलने वाली
मुलाक़ात का असर रखती
मरुस्थल की तपती धूप में
रेत से सूखे अधरों पर
नमी का चुंबन धरती
खामोश से लवों के
मचलते जज़्बातों की
ठंडी आह भरती
कुछ कहती कुछ सुनती
चुपके से ख्याब बुनती
रात भर साथ जगती
जिस्म के गलियारों में
लम्हों के घर बनाती
हसरतों के आसमां में
मुहब्बत के पंख लगाके
रूह के झरोखों से गुजरती
बे-खयाल बे-खुमारी में सिमटी
बे-बस करवट में लिपटी
बिस्तर की सिलवटों में
नर्म सा स्पर्श करती
ख़यालों की वादी में
ख़ुशबुएँ लुटाती
पावन प्रेम की गंगा में
निडर डुबकी लगाती
छूकर धड़कनों के कारवां
आरज़ू की तपिश में जलते हुए
नील गगन की उड़ान भरती
तू सदियों से दूर है
फिर भी हर पल
साथ रहती है मेरे
"कुछ ऐसी है तेरी याद "

(मनीष गुप्ता )

No comments:

Post a Comment

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...