आर्तनाद शनैःशनैः सिसकियोँ मेँ बदल जाऐगा ..
शिराओँ मेँ उबलता रक्त शिथिल पड जाऐगा ,
क्रोध की अग्नि मेँ जलता हर वाक्य बुझते बुझते बुझ जाऐगा
..उष्मा सारी भावनाओँ का वाष्पन कर देगी ..
एक लंबा अरसा दुःख झैल लोगे तुम , शांति से ।
बलवत कर दोगे हर अकारण उठनेँ वाले हाथ को ,
धैर्य से सुनोगे हर अपशब्द .सत्यनारायण की कथा की भाँती
..हर अकारण होनेँ वाले अन्याय को सहन कर लोगे क्योँ की
यही गाँधीवाद है और यही अहिँसा वाद
..इस तरह तुम करोगे बापू कि कीर्ती उज्वल ????..
जश्न

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