Friday, April 5, 2013

कुछ अच्छी बाते लिखनेँ का प्रयास किया है , अपनेँ विचार बताऐँ

ना गीता कुरान बाँचता हुँ ,
ना राज वेद के खोलता हूँ

सुना हुआ जो अम्माँ से है
वही आपको बोलता हुँ

जीवन मरण शाश्वत भाई
कुछ पाना खोना नहीँ होता

सदैव जो पीत चमकता है
वो हरदम सौना नहीँ होता

आँख सदा ही जो भी देखे
उसे सच मानना ठीक नहीँ

है निराकार उस ईश्वर की
अवमानना ठीक नही

मरता मानव गठरी बाँधे
क्या साथ खाक ले जाऐगा

अरे उपर सबकी गठरी है
जो जितना पुण्य कमाऐगा

रूपया पैसा खूब कमाये
शाही बैठक बनवाऐगा

रक्त मेँ लिपट कर आया था
लकडी पे लेट के जाऐगा

भूखा भौजन माँगता है तो
प्यासा माँगे है जल की धार

दान सुपात्र को नहीँ दिया
तो है सारे धरम बैकार ...

मुश्किल से मुश्किल घडी
धीरज से है गुजर जाऐ

जहाँ काम हो सूई से भैय्या
वहाँ तलवार काम नी आऐ

created by kumar Jashn

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