ये दुनिया सिर्फ अच्छे लोगों के लिए है, यहाँ बुरे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। यहाँ हर आदमी अच्छाई का समुंदर है, अगर तुम अच्छे नहीं हो तो तुम्हें ये दुनियाँ अपने अच्छाई के सागर में डुबो कर मार डालेगी, लिख लेना...
Thursday, December 24, 2020
Friday, September 18, 2020
लेखक बनते नहीं पैदा होते हैं
लेखक बनते नहीं पैदा होते हैं, जब दिन-दोपहरी, सुबह-शाम, काम-धाम के साथ कोई कोई पढ़ा लिखा युवा भरी जवानी में इश्क़ किताबों से करने लगे और लगातार किताबें पढ़ते पढ़ते दिमाग में बहूत सारे किताबें भर जाता है तो एक दिमागी रसायनिक प्रतिकृया के परिणाम स्वरूप एक किताब के छप जाने से लेखक का जन्म होता है।
सैफ इसरार नए वाले लेखक हैं, इन्होने बहूत सारी किताबें चाट लेने के बाद किताबों के स्याही से जो नशा चढ़ा तो उसे उतारने के लिए साहब नें किताब लिख डाली। नाम है "It just required one step". इसके साथ अब सैफ इसरार लेखक के नाम से जाने जाते हैं
लेखक होने से पेट नहीं भरता तो रोजी-रोटी के लिए ग्राफिक डिज़ाइनर हैं। साउदी अरब में पिछले तीन-चार सालों से रहते हैं। उनका लिखा किताब पढने पर पता चला की जितना उम्दा वो लिखते हैं उससे ज्यादा ज़िंदादिल आदमी हैं। आदमी कहना गलत होगा जबकि ज़िंदादिल युवा कहना ज्यादा सही है
सैफ बोकारो इस्पात नगर के रहने वाले हैं।
मैं सोंचा करता था किसी लेखक से मिलने पर बड़े नजाकत के साथ आदब के साथ मिलना होता है। पर उनसे मिलने पर मुझे लगा नहीं की उनसे बात करने के लिए किसी अदब जैसे चीजों की जरूरत है। परआप जैसे है वैसे मिल लीजिये आपको फील नहीं होगा की आप आने वाले समय के बड़े लेखक से मिल रहे हैं।
वैसे तो मैं किताबों में दिलचस्पी लेने वाला इंसान हूँ पर लंबे समय तक एक किताब पर नजरें जमाये रहना मेरे लिए चुनौतियों भरा काम होता है पर कुछ बार मिलने से ही साहब किताबे पढ़ने का रोग दे गए साथ में पढ़ने के लिए बहूत सारी किताबें भी। वर्तमान समय में मुझे लगता है किताबों का स्याही चाटने का लत मुझे भी पड़ गया है। सुना है नशा आदमी को बर्बाद कर देता है अब देखते है ये मुझे किताबें पढने का लत कहाँ ले जाकर छोडता है।
Tuesday, May 19, 2020
और बुरा हूं मैं !
मुझे अब उसके साथ होना चाहिए जब उसे मेरी जरूरत है मैं यह नहीं चाहता कि उसे जरा भी महसूस हो की उसे जब मेरी सख्त जरूरत थी तब मैं उसके साथ नहीं था. मुझे इस बात का डर है के लोगों का कहा वह बात सच ना हो जाए की इंसान को वह व्यक्ति ही मुसीबत में काम नहीं आता जिस पर वो सबसे ज्यादा भरोसा करता है यह बुरे दिन है तो बीत जाएंगे लेकिन एक सफेद और मखमली दामन पर लगा काला बदनुमा धब्बा छोड़ जाएंगे। पूरी उम्र के लिए जिसे देख हर किसी का किसी विश्वासपात्र के ऊपर से विश्वास डगमगाने लगेगा। बहुत बुरा होता है किसी का किसी पर से विश्वास उठ जाना। बुरा होता है बुरे वक्त में हम जितने अच्छा मानते हैं उनका साथ नहीं होना। आज मेरा उसके साथ नहीं होना भरोसे को सही या गलत के तराजू में रखकर तोला जाएगा। जब हर तरफ रिश्ते भरोसा खोते जा रहे हो वहां एक और विश्वास का दम घुट जाना बुरा है। उसने तो कभी नहीं कहा था कि मेरी अच्छाइयों के बदले तुम मुझे मेरे बुरे वक्त के अंधेरे में रोशनी बनकर खड़े रहना। नहीं कहा था उसने जब चारों तरफ अविश्वास का अंधेरा मेरे तरफ बढ़ेगा, उस समय में तुम पर आंख बंद करके भरोसा कर लूंगा और तुम मुझे संभाल लोगे, इस भरोसे का टूट जाना बुरा है और बुरा हूं जो इस बुरे वक्त में बुरा बन बैठा हूं।

Tuesday, May 5, 2020
बार बार यह दिन आए !!
कभी-कभी इस शहर को दिल खोलकर दुआ देने को जी चाहता है, इस शहर ने इतने नायाब दोस्त लोग जो दिए हैं. जिनसे अगर नहीं मिलते तो जिंदगी अधूरी रह जाती. दुनियादारी देखकर जब अनुमान लगाता हूं और स्वयं को भाग्यशाली पाता हूं ईश्वर के बनाए इस सृष्टि में कई एक बुराइयां हो सकती है किंतु उन्होंने मेरे साथ न्याय क्या है कुछ अच्छे लोगों को जोड़ कर।
जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं ।
सीतेश आजाद & विवेक सर
जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं ।
सीतेश आजाद & विवेक सर
Wednesday, April 29, 2020
डुगडुगी बजाकर खेल दिखाया और चला गया, "मदारी" बहुत याद आओगे
इरफान खान के जैसा अगर कोई कलाकार हो सकता था तो वह सिर्फ इरफान खान ही हो सकते थे। मैंने जब भी उनके फिल्में देखें उनको देखकर लगता ही नहीं था कि किसी पटकथा पर अभिनय किया जा रहा है ऐसा लगता था मानो इरफान खान किरदार मे रहकर आपनी कहानी बता रहे हो, बिल्कुल संजीदा एकदम जीवंत...
Tuesday, April 28, 2020
प्रकृति अब प्रतिशोध लेगी।
सारी चालाकी धरी रह जायेगी तुम्हारी, तुम्हारा समझदार होने का गुमान तुम्हारे बर्बादी का कारण बनेगा। अब तुमसे प्रेम करने वाला सँभलने का वक़्त भी देने के मूड में नहीं है.
तुम्हें क्या लगता था कोई तुमसे स्नेह और प्रेम के प्रतिफल तुम्हारी यातनाएं सहकर तुम पर अमृतवर्षा करता रहेगा? अपना सर्वश्व लुटाकर तुम्हारे रास्ते में फूल सजायेगा ? अगर तुम ऐसा सोंचते हो तो तुम गलत सोंचते हो ... बिलकुल गलत !!
अब प्रकृति तुम्हारे जुल्म के बदले शीतलता नहीं क्रोध बरपायेगा गुस्से का ज्वाला इत्ना तेज होगा की तुम कल्पना भी नही कर सकते।
इन्सान अपने दिमाग के प्रयोग से विज्ञान द्वारा कितना भी तरक्की क्यों ना कर ले किन्तु सत्य को झूठला नहीं सकता "पृथ्वी किसी का ऋण नहीं रखती, वह मूल को सूद समेत वापस करती है"
सारी यातनाएं जो पृथ्वी पर बोए गए, अब उसके फसल काटने का समय आ गया है।
जब किसी का अस्तित्व संकट में आ जाए तब उसे अपने रक्षा के लिए रौद्र रूप धारण करना आवश्यक हो जाता है।
तुम्हें ख़याल भी है की तुम अपने चालाक और समझदार होने के मद में उतावले होकर प्राकृतिक की ओर दौड़ पड़े रास्ते में पड़ने वाले पेड़-पौधों जीव जंतुओं नदी नालों को रौंदकर तहस-नहस कर डाला, जिधर तुम्हें हरा भरा जंगल दिखा उधर कुल्हाड़ी लेकर लग गए सीमेंट और कंक्रीट के जंगल उगाने, आकाश नीला था वहाँ तुमने कारखानों का जहर घोल दिया, बड़े-बड़े विराट पर्वतों को भी तोड़कर न जाने कितने सड़कें और ऊंचे मकान बनाया तुमने। तुम्हें खबर भी है कि तुम किधर भी गए सिर्फ प्रकृति का दोहन ही किया।
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है प्रकृति अब नरमी बरतने के मूड में नहीं है, जिसका अंदाज सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है बेखौफ झुंड के झुंड बेतहाशा भागने वाले चालाक इन्सान घरों में बंद है। देश दुनियाँ में ताला लग चूका है. पहिये का अविष्कार हुआ तब से लेकर आज तक इंसान कभी रुका ही नहीं, मोटर, बस, बुलेट ट्रैन, जेट बनाकर दुनियाँ को मुट्ठी में समेट लेने वाले लोगों की समझ एक वायरस के सामने धरी की धरी रह गई।
तुम्हें क्या लगता था कोई तुमसे स्नेह और प्रेम के प्रतिफल तुम्हारी यातनाएं सहकर तुम पर अमृतवर्षा करता रहेगा? अपना सर्वश्व लुटाकर तुम्हारे रास्ते में फूल सजायेगा ? अगर तुम ऐसा सोंचते हो तो तुम गलत सोंचते हो ... बिलकुल गलत !!
अब प्रकृति तुम्हारे जुल्म के बदले शीतलता नहीं क्रोध बरपायेगा गुस्से का ज्वाला इत्ना तेज होगा की तुम कल्पना भी नही कर सकते।
इन्सान अपने दिमाग के प्रयोग से विज्ञान द्वारा कितना भी तरक्की क्यों ना कर ले किन्तु सत्य को झूठला नहीं सकता "पृथ्वी किसी का ऋण नहीं रखती, वह मूल को सूद समेत वापस करती है"
सारी यातनाएं जो पृथ्वी पर बोए गए, अब उसके फसल काटने का समय आ गया है।
जब किसी का अस्तित्व संकट में आ जाए तब उसे अपने रक्षा के लिए रौद्र रूप धारण करना आवश्यक हो जाता है।
तुम्हें ख़याल भी है की तुम अपने चालाक और समझदार होने के मद में उतावले होकर प्राकृतिक की ओर दौड़ पड़े रास्ते में पड़ने वाले पेड़-पौधों जीव जंतुओं नदी नालों को रौंदकर तहस-नहस कर डाला, जिधर तुम्हें हरा भरा जंगल दिखा उधर कुल्हाड़ी लेकर लग गए सीमेंट और कंक्रीट के जंगल उगाने, आकाश नीला था वहाँ तुमने कारखानों का जहर घोल दिया, बड़े-बड़े विराट पर्वतों को भी तोड़कर न जाने कितने सड़कें और ऊंचे मकान बनाया तुमने। तुम्हें खबर भी है कि तुम किधर भी गए सिर्फ प्रकृति का दोहन ही किया।
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है प्रकृति अब नरमी बरतने के मूड में नहीं है, जिसका अंदाज सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है बेखौफ झुंड के झुंड बेतहाशा भागने वाले चालाक इन्सान घरों में बंद है। देश दुनियाँ में ताला लग चूका है. पहिये का अविष्कार हुआ तब से लेकर आज तक इंसान कभी रुका ही नहीं, मोटर, बस, बुलेट ट्रैन, जेट बनाकर दुनियाँ को मुट्ठी में समेट लेने वाले लोगों की समझ एक वायरस के सामने धरी की धरी रह गई।
यह प्रकृति का महज एक संकेत नहीं चुनौती है की अगर आने वाले समय में इंसान अपनी आदतों से बाज नहीं आए और प्राकृतिक के कार्यों में हस्तक्षेप किया तो अगले बार स्थिति और भयावह हो सकती है और उसका जिम्मेदार वे स्वयं होंगे।
-कुमार अभय

Tuesday, March 17, 2020
अब कहाँ है रास्ता
अब कहां है रास्ता?
अब कहाँ है रास्ता
यार रब तू ही बता
गर तेरा आकाश है ?
तो क्यों अन्धेरा दिख रहा?
हो तो अब आ भी जा
बता भी दे क्या चाहता
तू तो है सबसे बड़ा
बता क्यों है छिप रहा?
हो तो अब प्रमाण दो
चुप हूं अब तो सुन जरा
बता दे क्या है खेल ये
और क्या है माजरा?
क्या तोड़ता, क्या रच रहा
यार बस एक बात कह
चेहरे पर मुस्कान दी
पर क्या है अंदर चुभ रहा?
तू जानता है सब मगर
टेढ़ी कर दी हर डगर
खो जाऊँगा ये है खबर
फिर क्यों तेरा है आसरा ?
मैं तो फिर इंसान हूं
अपनी सोच तू जरा
पत्थर पर सर पटक दूँ
तू बता कब रोयेगा ?
मेरा तो एक अंत है
सुना है तू अनंत है?
गर मेरा कुछ अस्तित्व है
तेरा भी हो कुछ पता ?
कुछ तो है जो चल रहा
क्या है जो वह पल रहा
एक नया सा जन्म होगा
या है सूरज ढल रहा?
हो तो एक आवाज दो
कल का है वह आज दो
इससे पहले देर हो
तेरे घर भी सवेर हो
एक बात पर विचार कर
वक़्त हो तो सोंचना
तुने ही ये जग बनाइये?
और क्या तू कर रहा?????
-कुमार अभय
Tuesday, March 3, 2020
ओ बेखबर..तू क्यों दरबदर??
शहर-शहर, नगर-नगर
डगर-डगर, इधर-उधर?
पथिक तुझे तलाश क्या?
क्या चाहिये ओ बेखबर??
किसे तू है ढूँढता
क्या तुझमें नहीं खुदा ?
घर, लौट आ वक़्त पर
भटक रहा क्यों दरबदर?
मन में बस विश्वाश रख
खुद को अपने साथ रख
तू नाप लेगा ये धरा
कदमों में तेरे धरा शिखर
है मौन कुछ तो बोलता
चुप्पियों को सुन जरा
ये शोर है, वो झूठ है
भीड़ पर मत रख नज़र
चल पड़े हो तो सुनो
ख्वाब एक नया बुनो
रास्ते पर हक़ तुम्हारा
क्या सोंचते हो बैठ कर?
सुनता नहीं कोई यहाँ
हर कोई जवाब है
पत्थर तुझको ही पड़ेंगे
उंचे तेरे ख्वाब हैं।
समन्दर में तूम जा मिलोगे
बस एक नदी को पार कर
जीत जायेगा जहाँ तू 'अभय'
अपना सबकुछ हार कर।।
ओ बेखबर..तू क्यों दर बदर??
Copyright कुमार अभय
डगर-डगर, इधर-उधर?
पथिक तुझे तलाश क्या?
क्या चाहिये ओ बेखबर??
किसे तू है ढूँढता
क्या तुझमें नहीं खुदा ?
घर, लौट आ वक़्त पर
भटक रहा क्यों दरबदर?
मन में बस विश्वाश रख
खुद को अपने साथ रख
तू नाप लेगा ये धरा
कदमों में तेरे धरा शिखर
है मौन कुछ तो बोलता
चुप्पियों को सुन जरा
ये शोर है, वो झूठ है
भीड़ पर मत रख नज़र
चल पड़े हो तो सुनो
ख्वाब एक नया बुनो
रास्ते पर हक़ तुम्हारा
क्या सोंचते हो बैठ कर?
सुनता नहीं कोई यहाँ
हर कोई जवाब है
पत्थर तुझको ही पड़ेंगे
उंचे तेरे ख्वाब हैं।
समन्दर में तूम जा मिलोगे
बस एक नदी को पार कर
जीत जायेगा जहाँ तू 'अभय'
अपना सबकुछ हार कर।।
ओ बेखबर..तू क्यों दर बदर??
Copyright कुमार अभय
Sunday, January 12, 2020
सिर्फ वो.. उसके तरह
उसे फोटो खींचना बहूत पसंद है, लेकिन हर फोटोग्राफर का दबी इच्छा होती है की कोई उसकी तस्वीर भी खिंच दे ठीक वैसे ही जिस अंदाज और तजर्बे से वो दूसरों के तस्वीर खींचा करती है।
हमेशा ही समझदारी के साथ सभी से बात करने वाली लड़की मुझसे मिलती है तो वो पढ़ी लिखी लड़की अचानक से बेवकूफी भरे बातें करने लगती है, कहती है की वो सदियों से उदास इस दुनियाँ को गले लगा कर इसमें वो खुशियाँ भर देगी। लेकिन जब वह दुनियादारी में देखती है और जब वह दुनियाँ में अपने सोंच का नही कर पाती तो रो पड़ती है, बिल्कुल उस बच्चे की तरह जिसकी जिद्द पूरी ना होने पर जमीं पर पांव पटक पटक कर रोना सुरु कर देता है।
मैंने कितने ही बार उसे समझाने की नाकाम कोशिश की है की वो सिर्फ अपने बारे में सोंचा करे और खुश रहे पर वो मानती ही नहीं। उसे न समझा पाने पर जब हारने लगता हूँ, तब वो अचानक से बेवज़ह खुश हो जाती है. कहने लगती है तुम कभी हार नहीं सकता, और तुम हमेशा खुश रहा कर क्योंकि तुम्हे देख कर बहुत से लोग खुश होते हैं. और हारने वाली बात ??? मेरे पूछने पर कहती अबे तुम मेरे दोस्त हो इसी लिए हार नहीं सकते !
अजीब किस्म की पागल थी ?
वो दुनिया खुशियां को खुशियों से भर देना चाहती है. लेकिन मुझे डर लगता है कि वह इस दुनिया के झमेले में पड़कर यह दुनिया उसे अपनी तरह बना लेगा। जो मैं नही चहता क्योंकि उस जैसा दुनियाँ में सिर्फ एक है, सिर्फ वो...
... जारी रहेगा।
हमेशा ही समझदारी के साथ सभी से बात करने वाली लड़की मुझसे मिलती है तो वो पढ़ी लिखी लड़की अचानक से बेवकूफी भरे बातें करने लगती है, कहती है की वो सदियों से उदास इस दुनियाँ को गले लगा कर इसमें वो खुशियाँ भर देगी। लेकिन जब वह दुनियादारी में देखती है और जब वह दुनियाँ में अपने सोंच का नही कर पाती तो रो पड़ती है, बिल्कुल उस बच्चे की तरह जिसकी जिद्द पूरी ना होने पर जमीं पर पांव पटक पटक कर रोना सुरु कर देता है।
मैंने कितने ही बार उसे समझाने की नाकाम कोशिश की है की वो सिर्फ अपने बारे में सोंचा करे और खुश रहे पर वो मानती ही नहीं। उसे न समझा पाने पर जब हारने लगता हूँ, तब वो अचानक से बेवज़ह खुश हो जाती है. कहने लगती है तुम कभी हार नहीं सकता, और तुम हमेशा खुश रहा कर क्योंकि तुम्हे देख कर बहुत से लोग खुश होते हैं. और हारने वाली बात ??? मेरे पूछने पर कहती अबे तुम मेरे दोस्त हो इसी लिए हार नहीं सकते !
अजीब किस्म की पागल थी ?
वो दुनिया खुशियां को खुशियों से भर देना चाहती है. लेकिन मुझे डर लगता है कि वह इस दुनिया के झमेले में पड़कर यह दुनिया उसे अपनी तरह बना लेगा। जो मैं नही चहता क्योंकि उस जैसा दुनियाँ में सिर्फ एक है, सिर्फ वो...
... जारी रहेगा।
Monday, January 6, 2020
Happy New Year 2020
बात है 4 दिन पहले , यानी नए साल वाले दिन की, चुनाव हारने के बाद तिरपाल यादव चाचा बैठक में अपने प्रिय शुभचिंतकों के साथ सोमरस के साथ लिट्टी-मुर्गा का मज़ा लूट रहे थे. और पीछे से "आरा हिले छपरा हिले..." वाला मनभावन गीत कानों में पड़कर वातावरण को स्वर्गिक बना रहा था. वहाँ तिरपाल चाचा इन्द्र थे और मौके पर मौजूद उनके चेले-चपाटी अपने को अग्नी, पवन. सूर्य आदि देव के जैसा महसूस कर रहे थे.
इतने में नारायण-नारायण कहते नारद रुपी पत्रकार टुन्नू मिश्रा स्वर्ग में एंट्री मार दिए। मिश्रा जी को सम्मुख देख तिरपाल चाचा भाव विभोर से हो गए। गाना के आवाज से अपना आवाज ऊँचा कर के हैप्पी न्यू ईयर जिंदाबाद का जयघोष के साथ गले लग गए, अपने चमचों से कह कर अपने बगल में कुर्सी लगवा दिया और साथ में एक टेबल भी. चाचा के आदेश पर गोयठा में लिट्टी सेंक रहे सूर्य देव रूपी सेवक एक गिलास और 500 मि.ली. का सोमरस के बोतल के साथ टेबल में रख दिया। बोतल रखते समय सेवक ऐसे मुस्कुरा रहा था मानो कहना चाह रहा हो, की "चुनाव हारने के बावजूद हम सेहत से समझौता नहीं करते और अपने अतिथि का स्वागत अंग्रेज़ी शराब से ही करते हैं.... :)
इसके बाद तिरपाल चाचा हाँथ जोड़कर बड़े ही आदर पूर्वक पत्रकार बाबा को इतिश्री करने को आमंत्रित किये। इंद्र देव इतने भद्र तरीके से आवभगत के लिए पूछा जाना नारद बाबा मना नहीं कर पाए. और फिर क्या था चियर्स के उद्घोष के साथ सोमरस का सेवन हुआ।
फिर मिश्रा जी बोले नेता जी हर बरस नये साल में कुछ बुराई छोड़ने का प्रण लिया जाता है, तो आपने क्या बुराई छोड़ने का प्रण लिया?
नेता जी : ऐसा भी रिवाज है क्या? इस सब के बारे में हमें पता ही नहीं है। तो हमें बताइये क्या होता है इसमें ?
मिश्रा जी : नेता जी कर दिए न मजाक ? आपको ये सब पता ही होगा की आज नए साल में अपने अंदर की कोई बुराई छोड़ देने का प्रतिज्ञा कर लेता है ताकि आने वाला नया साल अच्छा बीते। जैसे कोई स्वस्थ्य को देखते हुए सुबह जल्दी उठने का प्रण लेता है, कोई गुस्सा नहीं करने का और कोई तो नशा से दूर रहने का ही प्रण लेता है.
नेता जी : वाह ये तो अच्छा है मैं सोंच रहा हूँ इस नए साल में विधायक या मंत्री का शपथ न सही शराब न पीने का ही शपथ ले लिया जाए. इससे स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और लोकसेवा अच्छे से कर पाएंगे। इसके बाद नेता जी ने कई शराब न पीने के कई वजह पर चर्चा हुआ और शराब नहीं पीने पर मुहर लग गया।
मिश्रा जी: आपमें विलोकसेवा का गुण के आधार पर आपको ही मंत्री होना चाहिए था। थोड़ा सा वोट से गड़बड़ा गया. नहीं तो आज ये जगह मंत्री आवास होता और आप मंत्री।
इस बात से थोड़ा सा भावुक हो गए नेता जी और बोतल खाली होने पर दूसरा बोतल मंगा लिया। बीच में मिश्रा जी टोक देते की शराब छोड़ने का शपथ लिए है आप, तब नेता जी बोले आज सालों बाद आप जैसा भाई मिला है इस लिए आज पी रहा हूँ कल से बंद... और कल सुधरने के तैयारी हेतु मदिरा कलकल बहे जा रही थी...
इन्द्र और नारद एक साथ सोमरस का सेवन करने में वर्तमान का दृश्य कोई देख लेता तो निश्चित ही अपना दोनों हाँथ जोड़ कर सर झुका लेता।
___आवारा कलम
इतने में नारायण-नारायण कहते नारद रुपी पत्रकार टुन्नू मिश्रा स्वर्ग में एंट्री मार दिए। मिश्रा जी को सम्मुख देख तिरपाल चाचा भाव विभोर से हो गए। गाना के आवाज से अपना आवाज ऊँचा कर के हैप्पी न्यू ईयर जिंदाबाद का जयघोष के साथ गले लग गए, अपने चमचों से कह कर अपने बगल में कुर्सी लगवा दिया और साथ में एक टेबल भी. चाचा के आदेश पर गोयठा में लिट्टी सेंक रहे सूर्य देव रूपी सेवक एक गिलास और 500 मि.ली. का सोमरस के बोतल के साथ टेबल में रख दिया। बोतल रखते समय सेवक ऐसे मुस्कुरा रहा था मानो कहना चाह रहा हो, की "चुनाव हारने के बावजूद हम सेहत से समझौता नहीं करते और अपने अतिथि का स्वागत अंग्रेज़ी शराब से ही करते हैं.... :)
इसके बाद तिरपाल चाचा हाँथ जोड़कर बड़े ही आदर पूर्वक पत्रकार बाबा को इतिश्री करने को आमंत्रित किये। इंद्र देव इतने भद्र तरीके से आवभगत के लिए पूछा जाना नारद बाबा मना नहीं कर पाए. और फिर क्या था चियर्स के उद्घोष के साथ सोमरस का सेवन हुआ।
फिर मिश्रा जी बोले नेता जी हर बरस नये साल में कुछ बुराई छोड़ने का प्रण लिया जाता है, तो आपने क्या बुराई छोड़ने का प्रण लिया?
नेता जी : ऐसा भी रिवाज है क्या? इस सब के बारे में हमें पता ही नहीं है। तो हमें बताइये क्या होता है इसमें ?
मिश्रा जी : नेता जी कर दिए न मजाक ? आपको ये सब पता ही होगा की आज नए साल में अपने अंदर की कोई बुराई छोड़ देने का प्रतिज्ञा कर लेता है ताकि आने वाला नया साल अच्छा बीते। जैसे कोई स्वस्थ्य को देखते हुए सुबह जल्दी उठने का प्रण लेता है, कोई गुस्सा नहीं करने का और कोई तो नशा से दूर रहने का ही प्रण लेता है.
नेता जी : वाह ये तो अच्छा है मैं सोंच रहा हूँ इस नए साल में विधायक या मंत्री का शपथ न सही शराब न पीने का ही शपथ ले लिया जाए. इससे स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और लोकसेवा अच्छे से कर पाएंगे। इसके बाद नेता जी ने कई शराब न पीने के कई वजह पर चर्चा हुआ और शराब नहीं पीने पर मुहर लग गया।
मिश्रा जी: आपमें विलोकसेवा का गुण के आधार पर आपको ही मंत्री होना चाहिए था। थोड़ा सा वोट से गड़बड़ा गया. नहीं तो आज ये जगह मंत्री आवास होता और आप मंत्री।
इस बात से थोड़ा सा भावुक हो गए नेता जी और बोतल खाली होने पर दूसरा बोतल मंगा लिया। बीच में मिश्रा जी टोक देते की शराब छोड़ने का शपथ लिए है आप, तब नेता जी बोले आज सालों बाद आप जैसा भाई मिला है इस लिए आज पी रहा हूँ कल से बंद... और कल सुधरने के तैयारी हेतु मदिरा कलकल बहे जा रही थी...
इन्द्र और नारद एक साथ सोमरस का सेवन करने में वर्तमान का दृश्य कोई देख लेता तो निश्चित ही अपना दोनों हाँथ जोड़ कर सर झुका लेता।
___आवारा कलम
नेकी कर सोशल मीडिया में डाल...
एक पुरानी कहावत है की देने वाले हाथ आराधना करने वाले हाथ से बड़े होते हैं, और एक पुरानी कहावत यह भी है की दान दाहिने हाथ से दी जाए तो बाएं को पता ना चले.पर यह दौर आधुनिक है हमारा पुरानी कहावत से कोई वास्ता नहीं और हम पूरानी बातों को नहीं मानते, हमारे नए दौर का अपना नया कहावत है "नेकी कर सोशल मीडिया में डाल..." और हम उसी को मानेंगे
तस्वीर गौर से देखे तो पता चलता है की देने वाले एहसान करते हुए प्रमाण के तौर पर तस्वीर ले चुकें है जबकि कम्बल प्राप्त करता व्यक्ति इस बार ठण्ड से तो बच जाएगा किन्तु इस एहसान के बोझ से शायद ही बच पाए ।
लोग दिखावे के रेस में इतनी तेज दौड़ रहे हैं की उन्हें खबर ही नहीं की संस्कार तेजी से पीछे छूट रहा है और वैचारिक दरिद्रता की और बढ़ रहे हैं.
मेरा समझना है की सोशल मिडिया का प्रयोग वैसे तस्वीरों और पोस्ट के लिए किये जाएँ जिससे लोग दान सहयोग करने के उद्देश्य से करें न की उपकार . दान वैसा होना चाहिए जिससे देने वाला आनंदित,और प्राप्त करने वाला सम्मानित महसूस करे ।
__आवारा कलम
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अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...
अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...
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अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...
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बहुत तेज़ दौड़ रहा था, कहीं पहुँचने के लिए बेतहाशा भाग रहा था। ऐसा भाग रहा था, मानो सबसे पहले मैं ही पहुँच जाऊँगा। भागते समय यह ख़याल भी नही...




