कभी-कभी इस शहर को दिल खोलकर दुआ देने को जी चाहता है, इस शहर ने इतने नायाब दोस्त लोग जो दिए हैं. जिनसे अगर नहीं मिलते तो जिंदगी अधूरी रह जाती. दुनियादारी देखकर जब अनुमान लगाता हूं और स्वयं को भाग्यशाली पाता हूं ईश्वर के बनाए इस सृष्टि में कई एक बुराइयां हो सकती है किंतु उन्होंने मेरे साथ न्याय क्या है कुछ अच्छे लोगों को जोड़ कर।
जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं ।
सीतेश आजाद & विवेक सर
जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं ।
सीतेश आजाद & विवेक सर


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