अब कहां है रास्ता?
अब कहाँ है रास्ता
यार रब तू ही बता
गर तेरा आकाश है ?
तो क्यों अन्धेरा दिख रहा?
हो तो अब आ भी जा
बता भी दे क्या चाहता
तू तो है सबसे बड़ा
बता क्यों है छिप रहा?
हो तो अब प्रमाण दो
चुप हूं अब तो सुन जरा
बता दे क्या है खेल ये
और क्या है माजरा?
क्या तोड़ता, क्या रच रहा
यार बस एक बात कह
चेहरे पर मुस्कान दी
पर क्या है अंदर चुभ रहा?
तू जानता है सब मगर
टेढ़ी कर दी हर डगर
खो जाऊँगा ये है खबर
फिर क्यों तेरा है आसरा ?
मैं तो फिर इंसान हूं
अपनी सोच तू जरा
पत्थर पर सर पटक दूँ
तू बता कब रोयेगा ?
मेरा तो एक अंत है
सुना है तू अनंत है?
गर मेरा कुछ अस्तित्व है
तेरा भी हो कुछ पता ?
कुछ तो है जो चल रहा
क्या है जो वह पल रहा
एक नया सा जन्म होगा
या है सूरज ढल रहा?
हो तो एक आवाज दो
कल का है वह आज दो
इससे पहले देर हो
तेरे घर भी सवेर हो
एक बात पर विचार कर
वक़्त हो तो सोंचना
तुने ही ये जग बनाइये?
और क्या तू कर रहा?????
-कुमार अभय

उदघोष करो आप.
ReplyDeleteविजय अमर गीत को..
नाम से ही प्रमाणित है.
जो भय रहित हो.. (अभय )
चलते रहो विजय पथ पर..
ज्ञान का मशाल लिए..
हम भी चलेंगे साथ मे.
जहाँ लोक का हित हो "!....
..
आपको कोटि कोटि नमन
Wah mere bhai
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