रॉक गार्डन
रांची में वैसे घूमने के बहुत से जगह हैं.. उसमे से एक जगह रॉक गार्डन है जैसा की नाम से उजागर हो रहा है यह बगीचा पत्थरों के ऊपर तराशा गया हैं तो मुझे लगता है आप रॉक गार्डन का अर्थ सही सही समझ गए होंगे ?? अगर कोई लोग नहीं समझे तो मोटे शब्दों में पत्थरों के ऊपर घूमने का स्थान समझ लीजियेगा ।
नोट:- आपको अगर पढ़ने में अटपटा लगे तो ये सोंच कर झेल लीजियेगा की मैं ज्यादा पढ़ा लिखा लेखक टाइप का आदमी नहीं हूँ।
सैर से पहले रास्ता जान लीजिये।
स्टेशन से बहार निकल कर आप सीधे रातू रोड का ऑटो ले लीजिये 20 या 25 रुपया भाड़ा में पंहुचा देगा उसके बाद एक दूसरा ऑटो लेकर कांके रोड में जाना होगा, वही ऑटो वाला 10 रुपया लेकर रॉक गार्डन (गांधीनगर) के गेट के पास उतार देगा। मतलब ज्यादा माथापच्ची की जरूरत नहीं है ढूंढने में कोई परेशानी नहीं होगा।
दाहिना पैर आगे कर के गेट में प्रवेश करिये।
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| मुख्य द्वार |
लेकिन टिकट उस से पहले कटवाना होगा, मूल्य है 30 रूपये/ व्यक्ति। कैमरा और अलग तरह के रिकॉर्डिंग उपकरण ले जाने के लिए अतरिक्त मूल्य पार्क वालों ने निर्धारित किये हैं. ये मोबाइल के लिए लागू नहीं होता तो आप मेरे तरह मुफ्त में मोबाइल ले कर जा सकते हैं.
मैप यहाँ भी है https://bit.ly/2Lvv9db
अपने नाम के अनुसार ये रांची के चट्टानी पहाड़ी स्थान में कारीगरी कर बनाया गया है. इसके चारो तरफ जहाँ जहाँ जगह खाली है वहां सलीके से पेड़ लगाए गए है जो इसके खूबसूरती में एक कुछ अंक और जोड़ देता है। यहाँ से कांके डैम का खूबसूरत नजारा मन मारक होता है (इसका फोटो आगे सलीके से लगा दिया है देख लीजियेगा). इसका सीधा सम्बन्ध आपके फोटो खिचवाने से है, अगर आप फोटोग्राफी या सेल्फी के शौकीन हैं तो एक बार यहाँ हो आइये।
इस स्थान में लोग पिकनिक मानाने के उद्देश्य से आते हैं।
पार्क में जितना कारीगरी किया जाना चाहिए था उतना उन्होंने किया है, आपको कोई ऐसा जगह नहीं दिखेगा जहां बनाने वालों ने दिमाग नहीं लगाया हो. जैसे जहाँ पेड़ लगा है उसके निचे बैठने के लिए कुर्सी लगा दिया है, कहीं झूले तो कहीं मूर्ति।
प्रेमी जोड़ों के लिए मधुवन है यह पार्क
प्यार किया तो डरना क्या सीधे रॉक गार्डन जाइये। मेरा मतलब है यह स्थान प्रेमी जोड़ों के लिए वरदान जैसा है. जब मैं यहाँ पहली दफा गया तो अचरज में पड़ गया की सुहाने मौसम में सब छतरी ओढ़ के जोड़े में बैठे कर क्या रहे है? कुछ गमछा या दुपट्टा ओढ़े बैठे थे. ,मैंने सोचा पुरुष महिला के आँखों में गया कचरा निकाल रहा होगा . पता नहीं चल पा रहा था की वे गमछे के पीछे पुरुष महिला मित्र के आँखों से कौन सा कचरा निकाल रहा है. परेशान तो तब हो गया जब हर तरफ जोड़े में लोग एक जैसे हरकत कर रहे थे.
कुछ देर देखने के बाद समझ आया की ये लोग प्रेम कर रहे हैं. खामखा परेशान हो गया मैं. यहां देख कर दिमाग ने देश का एक बड़ा समस्या का समाधान कर दिया की अगर युवाओं के लिए प्रेम करने के लिए इस पार्क का व्यवस्था कर दिया जाए जहां युवा लगे रहें
आपके लिए सिखने जैसी बात इसमें ये है की वहां महिला मित्र के साथ जाने से पहले गमछा या छाता जरूर ले लें.
अगर आप जोड़े में नहीं जा रहे हैं तो आप आपके लिए अकेले बैठने का जगह ढूंढना मुश्किल हो सकता है. मैं नफरत के इस दौर में एक साथ इतने प्रेम करते लोगों को देख कर धन्य हो गया. लोग कहते हैं प्रेम दीखता नहीं तो उनको यहाँ का एड्रेस बता दीजिये, पूरा कांसेप्ट क्लियर न हो जाए तो कहना। यहाँ आने के बाद मैं दावे के साथ कहूंगा की यहाँ से होकर गया आदमी सीधा मोक्ष को प्राप्त होगा।
इस तरह के आनंद के लिए इस प्रकार के साधन यहाँ उपलब्ध है. बचपन में स्कूल में भीड़ के कारन अगर ये वाला झूला का मजा नहीं ले पाए हों तो यहाँ ये अधूरा शौंक पूरा हो जायेगा. क्योंकि ये अक्सर खाली ही रहता है.
बाकी तस्वीरों की जुबानी आगे सस्वती बता देगी।
ये सीढी की ख़ूबसूरती सीधे दिल तक जाती है
ये दाहिने तरफ के तस्वीर में झूला पूल पार्क के सौंदर्य में जान ड़ाल देता है, इसमें चढ़ कर कलकत्ते के हावड़ा पूल का तो फील नहीं आएगा पर फोटो लाजवाब आएगा।
जैसा हमने पहले बताया था यहाँ से कांके डैम का आकर्षक नजारा दीखता है तो देख लीजिये हम झूठ नहीं लिखते।
ये पोस्ट मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है आशा है आप उसी अंदाज में लेंगे, और एक बात आपसे की हमेशा मजे में रहिये।











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