Friday, August 17, 2018

बदलते दौर में बदल गई आजादी

आजादी के 71 साल हो गए लेकिन अभी भी कुछ लोगों को लगता है कि उन्हें आजादी नहीं मिली उनकी नजर में अंग्रेजों का भारत छोड़कर चले जाना भर ही आजादी का मापदंड नहीं है उन्हें यह लगता है कि आजादी की बेड़ियां अब तक खुली ही नहीं है वैसे लोगों को आज भी अपने मन की आजादी की तलाश है।
इसकी सच्चाई आप इस बात में तलाश सकते हैं कि देश के एक नामी गिरामी कॉलेज के परिसर में कुछ लड़के हमें चाहिए आजादी के नारे लगाते हैं। अपने ही देश के किसी शहर में लोग विदेशी मुल्क के झंडे लहराते हैं... और इन्हें इस बात की आजादी चाहिए।
यह देश विरोधी है यह तो दिखते हैं लेकिन कुछ देशद्रोही लोग नहीं दिखते ।
एक सरकारी बाबू को काम ना करने की आजादी चाहिए, वो कहते तो नहीं पर गांधी जी की तस्वीर के आगे बैठकर लोगों से खुलेआम रिश्वत लेने की आजादी चाहिए। समाज में सभ्य दिखने वाले लोगों को अपने घरों में बीवियों को बेवजह पीटने की आजादी चाहिए, कुछ सूट बूट पहने पढ़े लिखे लोगों को ट्रेन में सरेआम मूंगफली के छिलके बिखेरने, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन की दीवारों पर गुटखा, खैनी पान की पीक से हस्ताक्षर करने की आजादी चाहिये । सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को पढ़ाने से आजादी चाहिए नए नए पैसे के लत में पड़े बच्चों को पुराने घर और बुजुर्गों से पिंड छुड़ाने की आजादी चाहिए। कुछ लोगों को बच्चों से मजदूरी करवाने की आजादी चाहिए।
आजादी फिजूल में नहीं मिलती इसकी कीमत अदा करनी पड़ती है। हमारे बुजुर्गों ने आजादी के हवन कुंड में न जाने कितनों अपने प्राणों की आहुति अर्पित की है । और यह आजादी ही तो है कि देश के बारे में इतना कुछ कहने वाले उतने ही सुरक्षा पाते हैं जितना कि देश के अन्य नागरिक।
किसी ने कहा है आजादी का अर्थ बेहतर होने से है और देश तब तक बेहतर नहीं हो सकता जब तक देश के लोग इस मानसिक गुलामी से आजाद नहीं हो जाते।
इस स्वतंत्रता दिवस आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि इस बार से अपने हिस्से का स्वतंत्रता दिवस देश के प्रति कोई जिम्मेदारी के साथ मनाएं क्योंकि यह देश आपसे है और हमारे देश को हमारे आज के क्रियाकलापों के आधार पर शीर्ष पर पहुंचना है।

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