Wednesday, September 26, 2018

ढेरों शुभकामनाएं बच्चों।

मैं तो कभी-कभी हैरान हो जाता हूं इन बच्चों के बीच जाकर. गांव में रहने वाले इन बच्चों में जानने की उत्सुकता इतनी अधिक कैसे है? जब इन से बात करता हूं तो बातों ही बातों में  वे कुछ ऐसे ऐसे सवाल पूछ बैठते हैं जिसका जवाब मेरे पास नहीं होता...
                  सोचने के लिए विवश हो जाता हूं की गांव से धूल सने पवों के साथ स्कूल आने वाले इन बच्चों को इनके बचपन वाले टेढ़े मेढ़े कुछ उटपटांग तो कुछ हैरतअंगेज सवालों का जवाब दे दिया जाये तो निश्चित तौर पर यह बच्चे आगे चलकर विश्व के कई अनसुलझी सवालों के जवाब ढूंढ लेंगे।
 ढेरों शुभकामनाएं बच्चों।

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