बात है 4 दिन पहले , यानी नए साल वाले दिन की, चुनाव हारने के बाद तिरपाल यादव चाचा बैठक में अपने प्रिय शुभचिंतकों के साथ सोमरस के साथ लिट्टी-मुर्गा का मज़ा लूट रहे थे. और पीछे से "आरा हिले छपरा हिले..." वाला मनभावन गीत कानों में पड़कर वातावरण को स्वर्गिक बना रहा था. वहाँ तिरपाल चाचा इन्द्र थे और मौके पर मौजूद उनके चेले-चपाटी अपने को अग्नी, पवन. सूर्य आदि देव के जैसा महसूस कर रहे थे.
इतने में नारायण-नारायण कहते नारद रुपी पत्रकार टुन्नू मिश्रा स्वर्ग में एंट्री मार दिए। मिश्रा जी को सम्मुख देख तिरपाल चाचा भाव विभोर से हो गए। गाना के आवाज से अपना आवाज ऊँचा कर के हैप्पी न्यू ईयर जिंदाबाद का जयघोष के साथ गले लग गए, अपने चमचों से कह कर अपने बगल में कुर्सी लगवा दिया और साथ में एक टेबल भी. चाचा के आदेश पर गोयठा में लिट्टी सेंक रहे सूर्य देव रूपी सेवक एक गिलास और 500 मि.ली. का सोमरस के बोतल के साथ टेबल में रख दिया। बोतल रखते समय सेवक ऐसे मुस्कुरा रहा था मानो कहना चाह रहा हो, की "चुनाव हारने के बावजूद हम सेहत से समझौता नहीं करते और अपने अतिथि का स्वागत अंग्रेज़ी शराब से ही करते हैं.... :)
इसके बाद तिरपाल चाचा हाँथ जोड़कर बड़े ही आदर पूर्वक पत्रकार बाबा को इतिश्री करने को आमंत्रित किये। इंद्र देव इतने भद्र तरीके से आवभगत के लिए पूछा जाना नारद बाबा मना नहीं कर पाए. और फिर क्या था चियर्स के उद्घोष के साथ सोमरस का सेवन हुआ।
फिर मिश्रा जी बोले नेता जी हर बरस नये साल में कुछ बुराई छोड़ने का प्रण लिया जाता है, तो आपने क्या बुराई छोड़ने का प्रण लिया?
नेता जी : ऐसा भी रिवाज है क्या? इस सब के बारे में हमें पता ही नहीं है। तो हमें बताइये क्या होता है इसमें ?
मिश्रा जी : नेता जी कर दिए न मजाक ? आपको ये सब पता ही होगा की आज नए साल में अपने अंदर की कोई बुराई छोड़ देने का प्रतिज्ञा कर लेता है ताकि आने वाला नया साल अच्छा बीते। जैसे कोई स्वस्थ्य को देखते हुए सुबह जल्दी उठने का प्रण लेता है, कोई गुस्सा नहीं करने का और कोई तो नशा से दूर रहने का ही प्रण लेता है.
नेता जी : वाह ये तो अच्छा है मैं सोंच रहा हूँ इस नए साल में विधायक या मंत्री का शपथ न सही शराब न पीने का ही शपथ ले लिया जाए. इससे स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और लोकसेवा अच्छे से कर पाएंगे। इसके बाद नेता जी ने कई शराब न पीने के कई वजह पर चर्चा हुआ और शराब नहीं पीने पर मुहर लग गया।
मिश्रा जी: आपमें विलोकसेवा का गुण के आधार पर आपको ही मंत्री होना चाहिए था। थोड़ा सा वोट से गड़बड़ा गया. नहीं तो आज ये जगह मंत्री आवास होता और आप मंत्री।
इस बात से थोड़ा सा भावुक हो गए नेता जी और बोतल खाली होने पर दूसरा बोतल मंगा लिया। बीच में मिश्रा जी टोक देते की शराब छोड़ने का शपथ लिए है आप, तब नेता जी बोले आज सालों बाद आप जैसा भाई मिला है इस लिए आज पी रहा हूँ कल से बंद... और कल सुधरने के तैयारी हेतु मदिरा कलकल बहे जा रही थी...
इन्द्र और नारद एक साथ सोमरस का सेवन करने में वर्तमान का दृश्य कोई देख लेता तो निश्चित ही अपना दोनों हाँथ जोड़ कर सर झुका लेता।
___आवारा कलम
इतने में नारायण-नारायण कहते नारद रुपी पत्रकार टुन्नू मिश्रा स्वर्ग में एंट्री मार दिए। मिश्रा जी को सम्मुख देख तिरपाल चाचा भाव विभोर से हो गए। गाना के आवाज से अपना आवाज ऊँचा कर के हैप्पी न्यू ईयर जिंदाबाद का जयघोष के साथ गले लग गए, अपने चमचों से कह कर अपने बगल में कुर्सी लगवा दिया और साथ में एक टेबल भी. चाचा के आदेश पर गोयठा में लिट्टी सेंक रहे सूर्य देव रूपी सेवक एक गिलास और 500 मि.ली. का सोमरस के बोतल के साथ टेबल में रख दिया। बोतल रखते समय सेवक ऐसे मुस्कुरा रहा था मानो कहना चाह रहा हो, की "चुनाव हारने के बावजूद हम सेहत से समझौता नहीं करते और अपने अतिथि का स्वागत अंग्रेज़ी शराब से ही करते हैं.... :)
इसके बाद तिरपाल चाचा हाँथ जोड़कर बड़े ही आदर पूर्वक पत्रकार बाबा को इतिश्री करने को आमंत्रित किये। इंद्र देव इतने भद्र तरीके से आवभगत के लिए पूछा जाना नारद बाबा मना नहीं कर पाए. और फिर क्या था चियर्स के उद्घोष के साथ सोमरस का सेवन हुआ।
फिर मिश्रा जी बोले नेता जी हर बरस नये साल में कुछ बुराई छोड़ने का प्रण लिया जाता है, तो आपने क्या बुराई छोड़ने का प्रण लिया?
नेता जी : ऐसा भी रिवाज है क्या? इस सब के बारे में हमें पता ही नहीं है। तो हमें बताइये क्या होता है इसमें ?
मिश्रा जी : नेता जी कर दिए न मजाक ? आपको ये सब पता ही होगा की आज नए साल में अपने अंदर की कोई बुराई छोड़ देने का प्रतिज्ञा कर लेता है ताकि आने वाला नया साल अच्छा बीते। जैसे कोई स्वस्थ्य को देखते हुए सुबह जल्दी उठने का प्रण लेता है, कोई गुस्सा नहीं करने का और कोई तो नशा से दूर रहने का ही प्रण लेता है.
नेता जी : वाह ये तो अच्छा है मैं सोंच रहा हूँ इस नए साल में विधायक या मंत्री का शपथ न सही शराब न पीने का ही शपथ ले लिया जाए. इससे स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और लोकसेवा अच्छे से कर पाएंगे। इसके बाद नेता जी ने कई शराब न पीने के कई वजह पर चर्चा हुआ और शराब नहीं पीने पर मुहर लग गया।
मिश्रा जी: आपमें विलोकसेवा का गुण के आधार पर आपको ही मंत्री होना चाहिए था। थोड़ा सा वोट से गड़बड़ा गया. नहीं तो आज ये जगह मंत्री आवास होता और आप मंत्री।
इस बात से थोड़ा सा भावुक हो गए नेता जी और बोतल खाली होने पर दूसरा बोतल मंगा लिया। बीच में मिश्रा जी टोक देते की शराब छोड़ने का शपथ लिए है आप, तब नेता जी बोले आज सालों बाद आप जैसा भाई मिला है इस लिए आज पी रहा हूँ कल से बंद... और कल सुधरने के तैयारी हेतु मदिरा कलकल बहे जा रही थी...
इन्द्र और नारद एक साथ सोमरस का सेवन करने में वर्तमान का दृश्य कोई देख लेता तो निश्चित ही अपना दोनों हाँथ जोड़ कर सर झुका लेता।
___आवारा कलम
Mast ba ho
ReplyDelete