Wednesday, September 10, 2014

guruvar ke kalam se....

=============मुहब्बत================
उसी की आहटों को सुन मेरी धड़कन चहकती है,
उसी चेहरे पे ख्वाबों में मेरी तबियत बहकती है।
मेरे होठों को चुपके से छुआ था भीड़ में जिसने,
उसी आँचल की खुशबू से मेरी साँसे महकती है।
रखा है क्या जो चाहत में मचलने की ज़रूरत है,
मुहब्बत की रवायत में क्यूँ जलने की ज़रूरत है।
ये परवाने फनाँ होते शमाँ की आशिकी में क्यूँ,
सबब ये है वो शम्माएँ भी तुमसी खूबसूरत है।
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