"तू 'गंगा' तो नहीं है न ? मैली गंगा को साफ़ करने के कितने सारे जतन कर लिए गए.. कुछ नहीं हुआ. गंगा आज भी मैली है.
पर ऐसा नहीं है कि गंगा साफ हो ही नहीं सकती.
आज अपना रास्ता बदल ले गंगा .. सब साफ हो जायेगा. मगर वह बदलेगी नहीं .. आदत हो गयी है उसकी मैल के साथ जीने की. तब?
फिर भी साफ हो सकती है. जानना चाहेंगी कैसे ?
अभी उसका उदगम स्थल 'हिमालय' भरभरा का गिर पड़े तो उसका रास्ता खुद बदल जायेगा. रास्ता बदलेगा तो युगों से जमीं गन्दगी भी उसके तांडव-प्रवाह में नेस्तनाबूद हो जायेगी. साथ में सारी छोटी नदियां भी राह बदलेंगी.
हिमालय के गिरने पर विनाश और नया सृजन अवश्यम्भावी है .. मेरे गिरने पर नहीं.
क्योंकि मेरी गंगा अभी खुद ही बदलने को तैयार नहीं है."
- नए साल की पूर्व-संध्या में 'तथागत' के जन्म के बाद पुरुष के दृष्टिकोण से दुनिया को देख कर क्यों न कुछ लिखा जाये?
पर ऐसा नहीं है कि गंगा साफ हो ही नहीं सकती.
आज अपना रास्ता बदल ले गंगा .. सब साफ हो जायेगा. मगर वह बदलेगी नहीं .. आदत हो गयी है उसकी मैल के साथ जीने की. तब?
फिर भी साफ हो सकती है. जानना चाहेंगी कैसे ?
अभी उसका उदगम स्थल 'हिमालय' भरभरा का गिर पड़े तो उसका रास्ता खुद बदल जायेगा. रास्ता बदलेगा तो युगों से जमीं गन्दगी भी उसके तांडव-प्रवाह में नेस्तनाबूद हो जायेगी. साथ में सारी छोटी नदियां भी राह बदलेंगी.
हिमालय के गिरने पर विनाश और नया सृजन अवश्यम्भावी है .. मेरे गिरने पर नहीं.
क्योंकि मेरी गंगा अभी खुद ही बदलने को तैयार नहीं है."
- नए साल की पूर्व-संध्या में 'तथागत' के जन्म के बाद पुरुष के दृष्टिकोण से दुनिया को देख कर क्यों न कुछ लिखा जाये?
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