Monday, June 10, 2013

jitna ho paye sar bacha k chalo...

कोई कहता है सर उठा के चलो
कोई कहता है सर झुक के चलो
मेरा अनुभव है इस ज़माने से
जितना हो पाए सर बचा के चलो


                                                                      दीपक गुप्ता - हास्य व्यंग्य कवि एवं मंच संचालक 

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अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...