Monday, March 1, 2021

वो लड़ा मगर सिर्फ अपने लिए लड़ा। Book Review Twelfth Fail

ट्वेल्थ फेल | Twelfth Fail | 12th Fail (Hindi)

Writer : Anurag Pathak
Book Price: 196
Pages: 175
publisher: 
Type:  Novel (Hindi)
Ratings : 4.6 Flipkart, 4.5 (Amazon)
Buy: https://amzn.to/2OemaRN

"प्रतिभाएं अकारण आगे नहीं बढ़ती। वे बढ़ती है आपने पुरुषार्थ से, अपने समर्पण से, अपनी मेहनत से, अपने त्याग से, अपनी प्रबल इच्छाशक्ति से।"

आज मैंने दूसरी बार इस किताब को पढ़ा है पहली बार भी जब मैंने पढ़ा था तब भी रोया था और आज भी, शायद मैं खुद को इस उपन्यास में ढुढ पा रहा हूं, या फिर उस पीड़ा को महसूस कर पा रहा हू! लेकिन मैं इसको जितना बार भी पढ़ता हू एक नया ऊर्जा का प्रवाह अपने अंदर महसूस करता हू। मैं सिर्फ इतना ही कह कर अपनी वाणी को समाप्त करूंगा की समस्या बाहर का अंधकार का नहीं है, समस्या तब होती है जब हमरा मन सुविधाओं के लालच में समझौता के अन्धकार में डूब जाता है।
मैं सभी हिन्दी प्रेमियों से कहना चाहता हूं कि सबको ये किताब एक बार जरूर पढ़नी चाहिए!


वर्षों बाद इस डिजिटल दुनिया से इतर कुछ अच्छा पढ़ा
एक प्रतियोगी छात्र किन मनोदशाओं से गुजरता है. कितने मान अपमान सहकर वह निरन्तर अपने लक्ष्य की तरफ उन्मुख रहता है.
जीवन में क्या क्या उसे प्रेरित करता है, कितने कठिन संघर्ष व जुझारू प्रवृत्ति के दम पर अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है, इसका सजीव चित्रण है यह कहानी !
प्रतियोगियों के संघर्ष का व रिजल्ट के बाद की दशा जिसमें कुछ चयनित प्रसन्न व बाकी कैसे उदास होते हैं.
इसका मार्मिक वर्णन कहानी के अन्तिम क्षणों में वरुण नाम के चरित्र के अपने दिल्ली के कमरे को छोड़ते हुए दिखाते समय लेखक ने किया है.
मनोज व श्रद्धा का एक दूसरे के प्रति निश्छल स्नेह व लक्ष्य के प्रति एक निष्ठ समर्पण मन रूपी वीणा को अन्दर तक झंकृत कर देता है, को परिष्कृत करता है....
बहुत कुछ प्रेरणादायक है इस उपन्यास में प्रतियोगी छात्रों व सुधी पाठकों के लिए.
ट्वेल्थ फ़ैल खुद से खुद का साक्षात्कार सा प्रतीत होता है! प्रत्येक सामान्य युवा अपने अंदर मनोज को प्रवाहित सा महसूस कर सकता है! ग्रामीण परिवेश के पात्रों का स्थानीय बोली में उदबोधन लेखक को मिट्टी पकड़ पहलवान साबित करता है ! श्रद्धा आज की नारी का प्रतिनिधित्व करती है जो ना केवल बौद्धिक क्षमता से परिपूर्ण है अपितु त्याग और स्नेह की प्रतिमूर्ति है ! पांडे और गुप्ता ने अपने खिलंदड़पान से हम सबको गुदगुदाने का अवसर दिया !
आज के दौर में समसामयिक सात्विक रचना के लिए लेखक अप्रतिम बधाई के पात्र है !!
अगली रचना के इन्तजार मे.
किसी व्यक्ति को अगर वास्तव में संघर्ष की परिभाषा जानना हो तो वो अनुराग पाठक की लिखी हुई यह किताब पढ़े. Priyanshu Vatsaly

Book is available on Amazon

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Twelfth Fail - 12th fail by anurag pathak



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