Wednesday, October 3, 2018

कब तक?

हमारे देश के कुछ ग़ुलाम आंखों में सपने देखे थे आजाद भारत का। ऐसे भारत का जहां का अन्नदाता सम्मान पाता हो,
 देश के गांव में रह रहे आखिरी बच्चे के चेहरे पर मुस्कुराता खुशहाल  बचपन हो।  महिलाओं को सम्मानित नजरों से देखा जाएगा क्योंकि किसी भी देश की तरक्की में महिलाओं का अहम योगदान होता है।
              बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था किसी भी कौम का विकास उस कौम के महिलाओं के विकास से मापा जाता है। इसी तर्ज पर हमारा देश बनेगा। समाज में रह रहे दबे कुचले लोगों को भी वही अवसर मिलेंगे जो एक खास को मिलता रहा है गांव से लेकर शहर तक अमीर से गरीब तक सबके पहुंच में स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी।
       श्रेष्ठता के साथ साथ हम भी शक्तिशाली देश में आगे खड़े होंगे।
क्या ऐसा देश बना?? सपनो वाला?? क्या आंखों ने अपने सपनों का जीवंत रूप पाया?
 ना जाने कब तक इन प्राथमिक में चीजों के लिए संघर्ष किया जाता रहेगा ??? ना जाने कब तक वह सपने का भारत बनेगा ???
कब तक?? कब तक??? कब तक...???

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अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...