Sunday, April 30, 2017

कुछ पंक्तियाँ दोस्तों के नाम

बड़े दिनों बाद लिख रहा हूँ... कुछ पंक्तियाँ दोस्तों के नाम
आशा करता हूँ आपसे वही प्यार मिलेगा जैसा आप मुझे हमेशा से देते आये हैं। इस कविता की शुरुआत मैंने अपने शहर के चाय केंद्र से की है जहाँ हम दोस्तों के मिलने का केंद्र स्थल होता है। इस जगह हम दोस्त मिलकर अपने हफ़्ते भर के थकन, और परेशानियों को मुँह चिढ़ाते हैं। 

नया मोड़ की चाय हो,
साथ में अपने भाय हों
लाईफ अपनी कुल गाय सी
मुसीबत भले कसाई हो

बस संग में अपने भाई हो...
दो बातें तेरे मन की
कुछ शरारत बचपन की
तु संग ही सब मस्ती अपनी
चाहे दिनभर ना कमाई हो

संग में अपने भाई हो...
सावन ना आए बात नहीं
पतझड़ ही बस आने दो
ऐसे ही हंसते रहना तुम
चाहे लाख तुफानें आई हों
कोई संग भले न हों

संग में अपने भाई हों ...
तुम हो तो खुदा अपना
तुम ही हो, तो खुदाई हो
तेरे रिश्ते की कैद भली है
ताउम्र भले ना रिहाई हो
जब कुछ भी अपनी हो न हो

बस संग में अपने भाई हों
सब कुछ अधुरा सा लगे
बुलंदी भी जैसे खाई हो
सब रूठे तुम ना रूठे
उम्र भर ना जुदाई है
सब कुछ छीन ऐ जिंदगी

बस संग में अपने भाई हों...
मिलिए मेरी मित्र मंडली से 🔺⥣

5 comments:

  1. नया मोड़ की चाय और साथ में अपना भाई,
    लाजवाब ।

    ReplyDelete
  2. Wo din, wo pal, ab sirf yadon me reh gaye sari dosti , sare bachpane kahi andhere me kho gaye .

    ReplyDelete

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...