Saturday, August 3, 2013

झोपड़ी जलाकर रौशनी वो सरेआम करते है।

Andhera hi andhera hai sach ki raho me,
wo Fareb ke ujaale me aaram krte hai...







अँधेरा ही अँधेरा है सच कि राहों में 
वो फरेब के उजालों में आराम करते हैं।  

hame kamjoor samajhti hai ye Dunia,
sar jhukakr jo hum Salaam krte hai....


हमें कमजोर समझती है ये दुनियाँ ,
सर झुकाके जो हम सलाम करते हैं।  
 
ek Diyaa bhi na jala saka mai logo k lie.
Jhopri jalakar rousni wo sareaam karte hai...

एक दीया भी  ना जला सका मैं लोगो के लिए ,
झोपड़ी जलाकर रौशनी वो सरेआम करते है। 
                                      …  निशब्द अभय 

No comments:

Post a Comment

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...