Thursday, November 19, 2015

बचकर किधर जाएगा

आज फिर लिखने का मन हुआ, आपके अवलोकनार्थ सप्रेम समर्पित

बंदे तु कब तक छिपाएगा,
जो अंदर है, बाहर तो आएगा !

जब अपनो की बात चलेगी,
तेरा मुखौटा उतर जाएगा !

हर तरफ़ मातमी मंजर है,
बचकर तू किधर जाएगा !

वक्त रहते लोहे सा बन जा,
ठोकर लगेगी, बिखर जाएगा !

ज़मीर अब भी जिंदा करले,
वर्ना आईना देख मर जाएगा !

कंकर-पत्थर से रिश्ते न तौल,
तू ये सोंच क्या ऊपर जाएगा ?

किसी के जीवन निखार 'अभय'
हो सकता है, तू भी संवर जाएगा...
निःशब्द अभय

Thursday, January 29, 2015

लड़ के सबसे जब थक जाता हुँ...

मेरी अब तक की सबसे प्यारी रचना जिसपर हिंदी काव्य के बड़े कलमकार आदरणीय सूर्य कुमार पाण्डेय जी का आशीर्वाद मिला।।  आपको पंक्तियाँ सौप रहा हूँ इस विश्वास के साथ की आप स्नेह देंगे। 

लड़ के सबसे जब थक जाता हुँ,

तुम बनके सुहानी शाम आती हो ।

क्या बताऊँ कितनी मौत मरा हूँ!

शरमाके जब चेहरा छिपाती हो ...


बज उठते हैँ सब तार मन के ,

हौले से जब पायल बजाती हो !

मीठा दर्द कहीँ कराह उठता है ,

छत पे जब जुल्फेँ सुखाती हो ...


बुरा भी नही लगता सताना मेरा , 

और फिर भी गुस्सा दिखाती हो ,

अच्छी बात नही, मैने सुना है ?

सहेलियों को मेरे किस्से सुनाती हो?


डरती भी हो मेरे गुम जाने से  ! 

फिर क्यों संग नहीं आती हो ?

देकर मुझे इक नयी सुबह !

तुम खवाबों में लौट  जाती हो ...

...निःशब्द अभय 

दोस्तों रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें ताकी मैं लिखने का प्रयास करता रहूँ |

Aaj se fir aapke dil ke darwaze pe mera dastak... Aapka nishabd abhay

I m Back friends...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...