Thursday, April 18, 2019

अखबारी लाल

अखबारी लाल.
उस आदमी को लेखक समझा जाता है जिसकी रचना अखबार में छपती हो, जिनकी नहीं छपती वो भला लेखक कैसे हो सकता है. मैं आपको बताता चलूँ की मेरी रचना अखबार मैं प्रकाशित हुई है लेकिन इसका क़तई मतलब नहीं की मैं कोई कलमकार जैसा कोई चीज हूँ। ये तो दीपक भैया का तारीफ़ है जो मेरे जैसे आलसी लड़के से लेख लिखवा लिया और समाचार पत्र में छापा भी।
                                                                     दीपक भैया कहते हैं आपकी लेखनी थोड़ी हट कर होती है,  ये तो मुझे नहीं पता की हट कर होती है या नहीं होती, इसका पड़ताल आपको करनी है. तो आपके हवाले वो अख़बार के कतरन कर रहा हूँ पढ़िए और बताइयेगा की मुझे आगे लिखना चाहिए या नहीं ?                                                                                                                                                                                                                         
My First article in Mithila Varnan,

मेरा दोस्त विकास कहता है की मेरा दुश्मन मैं खुद हूँ क्योंकि मैं अपने जुबान के वजह से अक्सर फँसता रहता हूँ, विकाश के बातों को आप सीरियस न लीजियेगा क्योंकि ये सलाहकार टाइप का बंदा है, वो जिससे भी मिलता है कोई न कोई सलाह दे आता है, विकास के बारे में फिर कभी बात करूँगा फिलहाल इतना जान लीजिये लातेहार में एक यही दोस्त है जिसके साथ हाथा-पाई, गाली-गलौज के साथ प्यार प्रदर्शित करने की आज़ादी है मुझे!! मतलब भाई है वो अपना। वो भाई है इसी लिए इसको किनारे कर के पहले लेख की और आता हूँ.
                               जैसा की बता चूका हूँ की अपनी जुबान ही मुझे जोखिम में डाल देती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. हुआ यों रविवार को मैं रांची गया था दीपक भैया शाम 4 बजे फ़ोन किया हर बार की तरह लेख लिखने को कहा विषय दिया पर्यावरण दिवस और मैंने हाँ कर दिया।  इस विषय पर कोई खास समझ नहीं बन रहा था की लिखा क्या जाए?  तो दोस्त आकाश को बताया की मुझे इस विषय पर लिखना है तो उसने एक लेखिका के बारे में बताया जो जंगल बचाने के आंदोलन में जेल जा चुकी है. उनसे बात हुई उन्होंने जंगल की कई सारी बातें बताई। जंगल कटाई से लेकर सरकार के जंगल लगाने के बारे में कई बातें कहीं  उन्होंने कहा हम जिस तरह से जंगल काट रहे हैं उसके तुलना में पेड़ नहीं लगाते। मैंने कहा की सरकार कहती है की वो जंगल लगा रहे हैं. इसपर उनका जवाब था की कुछ गिने हुवे पेड़ लगा देने से जंगल नहीं लगते हैं जिन सैकड़ो साल पुराने पेड़ों को काट कुछ पौधे लगाए गए हैं उन्हें कम से कम मैं तो जंगल नहीं कह सकती उनके बातों में गुस्सा था। उनसे मिलने के बाद ये लेख पूरा किया। भैया ने कहा था की शाम 5 बजे तक भेजने से रचना छपेगा लेकिन मैंने रात को 10 बजे दीपक भैया को भेजा ताकि भैया को ये न लगे की मैं कोशिश नहीं किया। मुझे उम्मीद नहीं था की मेरी रचना छपेगी लेकिन दीपक भैया को ये ही मंजूर था और दूसरे दिन छाप कर मुझे फोटो भेज दिया  :)  और इस प्रकार मैं पहली बार अपने लेख के साथ अखबार में छपा। मेरे इस लेख पर मुझसे ज्यादा खुश सीतेश हुआ था और फेसबुक पर मुझ से पहले पोस्ट कर दिया। 
इसके बाद कॉन्फिडेंस का पंख ही लग गया थोड़ा और आगे लिखा जो निचे चिपकाया है।

पढ़िए,आलोचना कीजिये, अच्छी लगे तो मेरा हौसला बढ़ा दीजिये, खामी है तो सलाह दीजिये, जरूरी लगे तो कान खींचिये और आपका मन करे तो टांग भी.... प्रतिक्रिया के इंतजार में रहूँगा !! 


Tuesday, April 9, 2019

चुनाव आने वाले हैं.

तस्वीर: गूगल की सहायता से। 
जब बेहिसाब बजने लगें नगाड़े, बीना शादी बंटने लगें छुहारे।
जब विलुप्त हो रहे माननीय,  आपके घर रोज पधारें
अचानक आपके ऊपर पुष्पक विमान से पुष्पवर्षा होने लगे
कोई झोंक अपना तन, मन, धन करे आपका अभिनन्दन,
तो अत्यधिक प्रसन्नं न हों भगवन, ये चुनाव आने के हैं लक्षण ।
इस चुनाव के आने के पर मैंने अपनी दूर दृष्टि जमाई,
दिमाग के मटके में मथनी घुमाई, तो ये निकला मलाई


कुछ दंगे होने वाले हैं 
कुछ लफड़े होने वाले हैं 
कुछ दो कौड़ी के नेता अब 
तगड़े  वाले हैं। ..... चुनाव आने वाले हैं। 

कुछ को मुकुट दिखाएंगे 
कुछ तो टोपी पहनाएंगे 
खूब झमाझम बारिश होगी 
नंगे सभी नहाएंगे। ..... चुनाव आने वाले हैं। 

कभी रोटी पर बात चलेगी 
कभी बोटी पर चर्चा होगा 
सारे मुद्दे उठ जायेंगे 
भिखमंगों पर भी खर्चा होगा ..... चुनाव आने वाले हैं। 

दर्द की अब छुट्टी होगी 
वादों की अब घुट्टी होगी 
इधर उधर जो बिखर गए थे 
बंद वो सारी मुट्ठी होगी ..... चुनाव आने वाले हैं। 

शर्म का पिंजरा टूटेगा 
एक सभ्य खजाना लूटेगा 
किसी का किस्मत चमकेगा 
किसी का भंडा फूटेगा..... चुनाव आने वाले हैं। 

कुछ जाने माने चेहरे 
गुमनाम भी होने वाले हैं 
कुछ शोहरत वाले लोग यहाँ 
बदनाम भी होने वाले हैं ..... चुनाव आने वाले हैं।

___ कुमार अभय  

वैधानिक चेतावनी: पढ़ने के बाद अच्छी या बुरी टिपण्णी न की तो आपको पाप लगेगा।






अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ...

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ... एक जादूगर जादू करता था, तितली को कबूतर, कबूतर को बाज़ और बाज़ को मोर बना देता था। ...