मेरी अब तक की सबसे प्यारी रचना जिसपर हिंदी काव्य के बड़े कलमकार आदरणीय सूर्य कुमार पाण्डेय जी का आशीर्वाद मिला।। आपको पंक्तियाँ सौप रहा हूँ इस विश्वास के साथ की आप स्नेह देंगे।
लड़ के सबसे जब थक जाता हुँ,
तुम बनके सुहानी शाम आती हो ।
क्या बताऊँ कितनी मौत मरा हूँ!
शरमाके जब चेहरा छिपाती हो ...
बज उठते हैँ सब तार मन के ,
हौले से जब पायल बजाती हो !
मीठा दर्द कहीँ कराह उठता है ,
छत पे जब जुल्फेँ सुखाती हो ...
बुरा भी नही लगता सताना मेरा ,
और फिर भी गुस्सा दिखाती हो ,
अच्छी बात नही, मैने सुना है ?
सहेलियों को मेरे किस्से सुनाती हो?
डरती भी हो मेरे गुम जाने से !
फिर क्यों संग नहीं आती हो ?
देकर मुझे इक नयी सुबह !
तुम खवाबों में लौट जाती हो ...
...निःशब्द अभय
दोस्तों रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें ताकी मैं लिखने का प्रयास करता रहूँ |
